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लोक दस्तावेजों या उनके भागों की अन्तर्वस्तु प्रमाणित प्रतियां पेश करके साबित के रूप में प्रयुक्त की जा सकती हैं।
केन्द्र/राज्य सरकार के अधिनियम-आदेश, संसद/विधानमंडल की कार्यवाही, राष्ट्रपति/राज्यपाल की उद्घोषणा, विदेशी शासकीय दस्तावेज आदि निर्दिष्ट तरीकों से साबित किए जा सकते हैं।
केन्द्र/राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से प्रमाणित प्रमाणपत्र/प्रमाणित प्रति की असलियत तथा हस्ताक्षरकर्ता की पदीय हैसियत न्यायालय उपधारित करेगा।
न्यायिक कार्यवाही में साक्षी के साक्ष्य या कैदी/अभियुक्त के कथन का न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित अभिलेख न्यायालय असली और सम्यक् रूप से लिया गया मानेगा।
शासकीय राजपत्र, समाचारपत्र/जर्नल, तथा विधि द्वारा निर्देशित रूप से रखी गई और उचित अभिरक्षा से पेश दस्तावेज की असलियत न्यायालय उपधारित करेगा।
विधि द्वारा अपेक्षित रूप में रखे गए और उचित अभिरक्षा से पेश शासकीय राजपत्र स्वरूप या विधि-निर्दिष्ट इलैक्ट्रॉनिक/डिजिटल अभिलेख की असलियत न्यायालय उपधारित करेगा।
केन्द्रीय/राज्य सरकार के प्राधिकार से बने तात्पर्यित मानचित्र/रेखांक शुद्ध माने जाएंगे, किन्तु किसी मामले हेतु बनाए मानचित्रों की शुद्धता साबित करनी होगी।
किसी देश की सरकार के प्राधिकार से प्रकाशित विधि-पुस्तकें और उस देश के न्यायालयों के विनिश्चयों की रिपोर्ट वाली पुस्तकें न्यायालय असली मानेगा।
नोटरी पब्लिक या न्यायालय/न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट/भारतीय कौंसल के समक्ष निष्पादित और अधिप्रमाणीकृत तात्पर्यित मुख्तारनामा न्यायालय वैसे ही निष्पादित मानेगा।
पक्षकारों के इलैक्ट्रॉनिक या डिजिटल हस्ताक्षर वाला करार तात्पर्यित इलैक्ट्रॉनिक अभिलेख, न्यायालय उन्हीं हस्ताक्षरों के साथ सम्पन्न हुआ मानेगा।